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साल के अंत में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा कारोबारी गुट, फ्री ट्रेड अग्रीमेंट पर बन सकती है सहमति

 

दुनिया का सबसे बड़ा कारोबारी गुट इस साल के अंत में अस्तित्व में आ सकता है। एशियाई देशों के व्यापार मंत्रियों ने रविवार को इस दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में फ्री ट्रेड अग्रीमेंट पर आम सहमति बन सकती है। रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) के तौर पर 16 देशों के मंत्रियों ने रविवार को टोक्यो में मुलाकात की और आपसी मतभेदों को दूर करने के प्रयास किए गए। बता दें इस गुट में भारत, चीन और जापान भी शामिल हैं जबकि अमेरिका नहीं है।

 

इस पार्टनरशिप में आसियान के 10 सदस्य देशों के अलावा दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यू जीलैंड भी शामिल हैं। गौर करनेवाली बात यह है कि यह पार्टनरशिप दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था को और करीब आधी आबादी को कवर करता है। वैसे, इस बात की संभावना नहीं है कि यह पैक्ट इसी साल की शुरुआत में बने 11 देशों के कॉम्प्रिहेन्सिव ऐंड प्रोगेसिव अग्रीमेंट फॉर ट्रांस पैसपिक पार्टनरशिप की तरह लेबर और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उच्च मानकों को लागू करेगा।

 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जापान के ट्रेड मिनिस्टर हिरोशिगे सेको ने कहा, 'अग्रीमेंट का मार्ग अब पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है। जैसे-जैसे संरक्षणवाद दुनिया में बढ़ रहा है, एशियाई क्षेत्र के लिए यह महत्वपूर्ण हो गया है कि हम फ्री ट्रेड के तहत आगे बढ़ें।'

 

फिलहाल देशों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं। सबसे बड़ी बाधाओं में से भारत की वह जरूरत भी शामिल है जिसके तहत मांग की जा रही है कि गुड्स ऐंड सर्विसेज पर टैरिफ्स को घटाने के किसी भी समझौते में लोगों को बिना रोकटोक आवाजाही की इजाजत भी मिलनी चाहिए। दरअसल, भारत अपने उच्च कुशल IT सेक्टर के लोगों के लिए इस तरह का फ्री मूवमेंट चाहता है। सिंगापुर के ट्रेड मिनिस्टर चान चुंग सिंग ने रविवार को कहा, 'इस समय ग्लोबल ट्रेडिंग सिस्टम के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। यह हमें इस बात की प्रेरणा देता है कि हम RCEP प्रक्रिया को निष्कर्ष तक पहुंचाने की कोशिश करें।' 


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