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आयरलैंड में भारतीय महिला की मौत के बाद बदल गया ये कानून

 

आयरलैंड में भारतीय मूल की सविता हलप्पनवार की मौत के छह साल बाद देश के गर्भपात कानून में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां के लोगों ने रूढ़िवादी कैथोलिक कानून में बदलाव के पक्ष में मतदान किया है। पीएम लियो वराड़कर ने देश के ऐतिहासिक जनमत संग्रह के परिणाम की घोषणा की। परिणाम के अनुसार 66 प्रतिशत से अधिक लोगों ने गर्भपात के खिलाफ संशोधन को निरस्त करने के पक्ष में मतदान किया।  

बता दें कि वर्तमान में आयरलैंड में केवल महिला का जीवन खतरे में होने की दशा में ही गर्भपात की अनुमति है। लेकिन दुष्कर्म, सगे संबंधी से ठहरे गर्भ या गर्भस्थ शिशु के असामान्य होने की स्थिति में गर्भपात की अनुमति नहीं है। जनमत संग्रह का परिणाम आने के बाद अब आठवें संशोधन को बदला जाएगा। इसी संशोधन के तहत गर्भस्थ शिशु और मां को समान रूप से जीवन का अधिकार दिया गया है। 

 

बता दें कि 35 साल पुराने संविधान में एक भारतीय महिला की मौत के छह साल बाद ये बड़ा बदलाव होगा। 31 वर्ष की सविता भारतीय मूल की डेंटिस्‍ट थीं और जब उन्‍हें पता लगा कि गर्भ में ही उनका बच्‍चा मर गया है तो उन्‍होंने अपनी प्रेग्‍नेंसी को टर्मिनेट कराना चाहा। लेकिन उनके अनुरोध को आयरलैंड के कड़े कानूनों की वजह से खारिज कर दिया गया। इसके बाद ज्‍यादा खून बह जाने की वजह से अक्‍टूबर 2012 में उनकी मौत हो गई थी। वर्तमान समय में आयरलैंड के आठवें संशोधन कहता है 'अजन्‍मे बच्‍चे की जिंदगी को भी' 'मां की जिंदगी की ही तरह जीने का अधिकार है।'

आयरलैंड के सरकारी प्रसारण आरटीई से वरदकर ने कहा, 'आज जो हमने देख रहे हैं वह आयरलैंड में पिछले 10 या 20 वर्षो में शांतिपूर्ण क्रांति का चरमोत्कर्ष है।'

 


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