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नहीं रहे सूफी गायक प्यारेलाल वडाली, देर रात हार्ट अटैक से निधन

 

नई दिल्ली: उस्ताद पुरन चंद वडाली के भाई उस्ताद प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार की सुबह अमृतसर में 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आखिरी सांस अमृतसर के फोर्टिस एस्कॉर्ट हास्पिटल में ली। बीमार होने की वजह से उन्हें गुरुवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पंजाबी सूफी भाईयों की जोड़ी 'वडाली ब्रदर्स' के नाम से पहचाने जाते रहे हैं।

संगीत की दुनिया में आने से पहले दोनों भाई अलग-अलग काम किया करते थे। बड़े भाई पूरनचंद 25 सालों तक अखाड़े में हाथ आजमा चुके हैं। वहीं दूसरी ओर छोटे भाई प्यारे लाल आमदनी के लिए गांव की रासलीला में कृष्ण की भूमिका निभाया करते थे।

वडाली ब्रदर्स ने 1975 में पहली बार अपने गांव गुरु की वडाली के बाहर गाया। इसके लिए दोनों भाई जालंधर के हरबल्ला संगीत सम्मेलन में शामिल होने गए, लेकिन यहां उन्हें गाने का मौका नहीं मिला, जिसके बाद इन्होंने हरबल्ला मंदिर में गाया। यहां ऑल इंडिया रेडियो के एक कर्मचारी की इन पर नजर पड़ी, जिसने इन्हें पहला गाना रिकॉर्ड करने का मौका दिया। ये अपने पैतृक गांव गुरु की वडाली में रहा करते थे, जहां वे संगीत सिखाया भी करते थे और इसके लिए उनके यहां संगीत सीखने आने वालों से कोई पैसा भी नहीं लेते थे।

वडाली ब्रदर्स ने साल 2003 में पहली बार बॉलीवुड में पिंजर फिल्म में गुलजार के शब्दों दर्दा मारेया को अपनी आवाज दी। इसके बाद भी वडाली ब्रदर्स ने बॉलीवुड में कई गाने गाए। इनमें तनु वेड्स मनु फिल्म से ऐ रंगरेज मेरे, मौसम से तू ही तू ही और धूप से चेहरा मेरे यार का भी काफी मशहूर हुए। इसके अलावा उनके ये गाने तू माने या न माने, याद पिया की, तेरा इश्क नचाया, दमादम मस्त कलंदर, घूघंट चक ओ जाना भी याद किए जाएंगे।

वडाली ब्रदर्स को 1992 में संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। 1998 में उन्हें तुलसी अवॉर्ड भी दिया गया था। पूरनचंद वडाली को पदमश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।


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