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सुप्रीम कोर्ट ने बदला फैसला, सिनेमाघरों में अब राष्ट्रगान बजाना जरूरी नहीं

 

नई दिल्ली: सिनेमाघरों में फिल्म दिखाने से पहले राष्ट्रगान चलाना फिलहाल अनिवार्य नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने नवंबर 2016 में दिए अपने ही आदेश में बदलाव करते हुए यह आदेश दिया. 

राष्ट्रगान मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर याचिकाकर्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कहा, 'सिनेमाघर में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बनाना अब अनिवार्य नहीं है, लेकिन अगर राष्ट्रगान बजाया जाता है, तो उसके सम्मान में सबको खड़ा होना होगा. सिर्फ दिव्यांग लोगों को छूट रहेगी.'

 

 

साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी छूट दी है कि वो भी अपने सुझाव सरकार द्वारा बनाई कमेटी को दे सकते हैं.
 

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने 30 नवंबर 2016 को दिए एक आदेश में देश के हर सिनेमाघर में फिल्म चालू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने का आदेश दिया था.ता दें कि 23 अक्टूबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि सिनेमाघरों और अन्य स्थानों पर राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो या नहीं, ये वो तय करे.  

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर सरकार ने कहा है कि उसने इस मसले पर नियम बनाने पर विचार करने के लिए एक कमिटी बनाई है. कमिटी की रिपोर्ट आने तक अगर कोर्ट चाहे तो फ़िल्म से पहले राष्ट्रगान की अनिवार्यता को खत्म कर दे.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि सरकार ने अंतर मंत्रालयी कमेटी बनाई है. कमेटी का गठन पांच दिसंबर को किया गया था, जो छह महीने में अपने सुझाव देगी. तब तक 30 नवंबर, 2016 के राष्ट्रीय गान के अनिवार्य करने के आदेश से पहले की स्थिति बहाल हो.

 


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