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निर्भया गैंगरेप: तीन दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई

 

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 के दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले (निर्भया गैंगरेप केस) में फांसी की सजा के खिलाफ दोषियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। यानी दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी गई है। मामले में मृत्युदंड की सजा पा चुके चार दोषियों में से तीन ने सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

बता दें कि निर्भया कांड के चार दोषियों में शामिल अक्षय कुमार सिंह (31) ने सुप्रीम कोर्ट के पांच मई 2017 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। 16 दिसंबर, 2012 की रात फिल्म देखकर लौटते समय 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा निर्भया (बदला हुआ नाम) के साथ छह लोगों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया था और हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दी थीं।

दोषियों ने निर्भया और उसके मित्र को नग्न हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया था। यहां तक कि दोनों को कुचलकर मारने की कोशिश भी की गई थी। इस मामले में दिल्ली की निचली अदालत और हाई कोर्ट ने चार दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा को मौत की सजा सुनाई थी। एक अभियुक्त ने ट्रायल के दौरान जेल मे खुदकशी कर ली थी जबकि एक अन्य नाबालिग था जो तीन साल की सजा पूरी होने के बाद छूट चुका है।

चारों अभियुक्तों ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी और सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल पांच मई को चारों की फांसी पर अपनी मुहर लगा दी थी। इसके बाद तीन अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। कोर्ट के तय नियमों के मुताबिक फांसी की सजा पाए दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर तीन न्यायाधीशों सीजेआइ दीपक मिश्रा, आर. भानुमति और अशोक भूषण की पीठ ने खुली अदालत में बहस सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था।


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