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KARNATAKA ELECTIONS 2018: कौन बनेगा कर्नाटक का किंग और क्या होगा इसका असर?

 

कर्नाटक: कर्नाटक विधानसभा चुनाव कई मामलों मे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह चुनाव भारत की राजनीति में एक नया मोड़ लाने का काम कर सकता है। कर्नाटक विधानसभा 2019 लोक सभा में प्रबल दावेदारी के साथ आगामी राज्यों के चुनावी परिणाम और यूपी में सपा बसपा गठबंधन जैसी कई चीजें साफ कर देगी। अगर अनुमान लगाया जाए तो कर्नाटक के चुनावी नतीजों से पहले विश्लेषण किया जा सकता है कि कर्नाटक में सरकार किसकी बनेगी। चुनावी नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल्स के मुताबिक किसी भी एकमात्र पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल रही है। ऐसे में गठबंधन होना तय है। कांग्रेस और बीजेपी दोनो पार्टियां सरकार बनाने के लिए आमने सामने हैं। वहीं जेडीएस किंगमेकर का काम करेगी। अब ऐसे में देखना यह होगा की जेडीएस किसके साथ हाथ मिलाती है।

जाहिर है, इस चुनाव में बसपा ने भी जेडीएस के साथ गठबंधन कर 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था। ऐसे में दलित वोट बैंक जेडीएस के समर्थन में गया होगा। अगर जेडीएस कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाती है तो राहुल गाँधी को अगले साल होने वाले लोक सभा के चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है। गौरतलब है कि कर्नाटक में लोक सभा की कुल 28 सीटें हैं जिसमें से फिलहाल बीजेपी के पास 17 हैं। ऐसे में कांग्रेस चाहेगी की बीजेपी की लोक सभा की सीटें घटकर कांग्रेस में शामिल हो जाए। इसके लिए कांग्रेस जेडीएस से हाथ मिलाने की हर संभव कोशिश करेगी और सत्ता का सुख हासिल करना चाहेगी। कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सिद्धारमैया ने यह घोषणा की थी की वो दलितों के लिए अपनी कुर्सी तक छोड़ने के लिए तैयार हैं। ऐसे में इसे जेडीएस और बसपा को लुभाने की कोशिश कहा जा सकता है। कर्नाटक की जनसंख्या का अगर आंकलन करें तो 20 प्रतिशत दलित वोट हैं। ऐसे में दलित वोट भी अहम योगदान दे सकते हैं। हालांकि इस बात से वंचित नहीं रहा जा सकता की बीजेपी के विजय रथ को रोकना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि बीजेपी को गठबंधन की सरकार चलाने में महारथ हासिल है।

वहीं अगर दूसरे पहलू की बात करें यानी अगर जेडीएस बीजेपी के साथ जाती है तो इसका क्या असर पड़ेगा। हालांकि बसपा से गठबंधन होने के बाद जेडीएस के बीजेपी के साथ जाने के आसार कम ही हैं। अगर जेडीएस बीजेपी के साथ जाती है तो पीएम मोदी और अमित शाह की 2019 की राह आसान हो जाएगी और लोक सभा चुनाव जीतना बीजेपी के लिए लगभग तय हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा असर पड़ेगा उत्तर प्रदेश की राजनीति पर। हाल ही में उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर की सीटों पर हुए उपचुनाव पर सपा बसपा साथ में लड़े थे और बीजेपी को धूल भी चटाई थी। यहां तक की योगी आदित्यनाथ का गढ़ मानी जानी वाली गोरखपुर की सीट भी बीजेपी के हाथों से निकल गई। ऐसे में यह आसार लगाए जा रहे थे की आगामी लोक सभा चुनाव में भी बुआ-भतीजे की जोड़ी साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। लोकिन अगर जेडीएस बसपा का गठबंधन कर्नाटक में बीजेपी को समर्थन दे देता है तो उत्तर प्रदेश में बुआ-भतीजे का साथ आना लगभग नामुंकिन है। ऐसे में बीजेपी की 2019 की राह और आसान हो जाएगी।

अब कांग्रेस और बीजेपी, दोनों की किस्मत का फैसला जेडीएस के हाथों में है। जहां एक तरफ बीजेपी अपना विजय रथ बरकरार रखना चाहेगी वहीं कांग्रेस अपने सबसे बड़े राज्य को बचाने में लगी होगी। जाहिर है, जेडीएस का किंगमेकर बनना तो तय है। 

(By: Ankur)


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