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कर्नाटक में हाई वोल्टेज राजनीति: कांग्रेस का जेडीएस को समर्थन, बीजेपी कर रही सरकार बनाने का दावा

 

बेंगलुरू: कर्नाटक विधानसभा में हाई वोल्टेज राजनीति खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। 12 मई को हुए मतदान के बाद 15 मई को चुनावी नतीजों की घोषणा हुई। नतीजे आने के साथ ही सरकार बनाने की कवायत तेज हो गई है। नतीजों में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो पाई है। जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी 104 साटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है तो वहीं सत्ता बचाने मे लगी कांग्रेस को 78 और किंगमेकर की भूमका निभाने वाली जेड़ीएस को 37 सीटों पर जीत मिली है। 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही बहुजन समाज पार्टी को एक सीट हासिल हुई। दो सीटें अन्य के खाते में गई।

पूर्ण बहुमत ना मिलने से कर्नाटक में अब सत्ता की बाघडोर राज्यपाल के पाले में है। कांग्रेस ने जेडीएस को अपना समर्थन दे दिया है। सीटों की गणित में लगातार हो रहे फेरबदल के बीच सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से फोन पर बात की थी जिसके तुरंत बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया गया। कांग्रेस ने कहा की वो जेडीएस को समर्थन देंगे और कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद सौंप कर खुद डिप्टी सीएम का पद संभालेंगे। इस सिलसिले में सिद्धारमईया ने जेडीएस के देवेगौड़ा और कुमारस्वामी से मुलाकात की जिसके बाद जेडीएस ने समर्थन स्वीकार कर के सरकार बनाने के दावा पेश कर दिया। जेडीएस ने दावा किया की वो 18 मई से पहले शपथ ग्रहण करेंगे। शाम को सिद्दारमईया ने अपना इस्तीफा दे दिया और कुमारस्वामी के साथ राज्यपाल से मिल कर बहुमत पेश करने का दावा किया। इस दौरान बीजेपी का कहना है था की वो पूरे नतीजे आने का इंतजार कर रही है।

सीटों की तुलना में बीजेपी ने शुरूआत में ही बढ़त बना ली थी। एक समय में तो बीजेपी पूर्ण बहुमत भी हासिल करती हुई दिखाई दे रही थी। हालांकी 12 बजे के बाद से बीजेपी की सीटों में गिरावट आई और वो पिछड़ती हुई दिखाई देने लगी। अंत में आकर बीजेपी 104 सीटों पर ही अटक कर रह गई। कांग्रेस के समर्थन के ऐलान के बाद बीजेपी में हलचल मच गई। बीजेपी के तीन बड़े नेताओं को बंगलुरू रवाना किया गया। येदियुरप्पा ने अपना दिल्ली दौरा रद्द कर दिया। साथ ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंल भी टाल दी गई। गौरतलब है की अमित शाह शाम के तीन बजे जीत की प्रेस कांफ्रेंस करने वाले थे। बीजेपी ने साफ तौर पर कहा की वो राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा करेंगे और बहुमत पेश करेंगे। बीजेपी का कहना है की वो कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायकों के संपर्क में है।

बीजेपी और कांग्रेस+जेडीएस के दावों के बाद अब यह पूरी तरह से प्रदेश के राज्यपाल पर निर्भर करता है की सरकार बनाने के लिए वो किसको आमंत्रित करते हैं। राज्यपाल के पास दो रास्ते हैं। पहला तो यह की वो सबसे बड़ी पार्टी यानी बीजेपी को सरकार बनाने का न्येता दें। दूसरा यह की वो गठबंधन से सरकार बनाने का दावा पेश कर रही पार्टियां यानी कांग्रेस और जेडीएस को सरकार बनाने के लिए बुलाएं। यह फैसला पूरी तरह से राज्यपाल पर निर्भर करता है की वो पहले किसको सरकार बनाने के लिए न्योता देते हैं। इसी बीच सरकार बनाने का दावा पेश कर रही बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा की अगुवाई में पार्टी विधायक दल की बैठक होनी है। इस बैठक में सभी 104 विधायकों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बैठक में केन्द्रीय प्रतिनिधी भी शामिल होंगे। वहीं कांग्रेस भी अपने शीर्ष नेताओं और जीते हुए 78 विधायकों के साथ कर्नाटक प्रदेश कमिटी में बैठक करेगी।

हालांकी इन सभी के बीच सबकी निगाहें कर्नाटक के राज्यपाल पर टिकी हैं की वो किसको सरकार बनाने का निमंत्रण देते हैं।


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