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बी एस येदियुरप्पा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, सुप्रीम कोर्ट में भड़की कांग्रेस

 

नई दिल्ली: कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। ऐसे में वीरवार सुबह 9 बजे बीजेपी के बी.एस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तीसरी बार कर्नाटक के सीएम बनने वाले येदियुरप्पा को राज्यपाल वजुभाई वाला ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।इससे पहले शपथ ग्रहण सामरोह में जाते वक्त येदियुरप्पा ने रास्ते में रूक कर राधा-कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना की। राजभवन पहुंचते ही उन्होंने बीजेपी नेताओं और डीजीपी से मुलाकात की जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

बता दें कि राज्यपाल वजुभाई ने बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों को समय दिया है। सूत्रों की मानें तो येदियुरप्पा आज बहुमत साबित करने की तारिख का ऐलान भी कर सकते हैं। कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई ने बहुमत साबित करने का दावा कर रहे बी.एस येदियुरप्पा को बुधवार शाम सरकार बनाने का न्योता भेजा था। राज्यपाल ने येदियुरप्पा को नई सरकार गठित करने और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। योदियुरप्पा को 15 दिनों में बहुमत साबित करनी होगी।

गौरतलब है कि राज्य में हुए चुनाव में बीजेपी 104 सीटें हासिल कर के सबसे बड़ी पार्टी बन गई। वहीं चुनाव के बाद कांग्रेस जेडीएस गठबंधन के 116 विधायक हैं जो बहुमत के जादुई आंकडे को पार करता है। कांग्रेस जेडीएस ने भी राज्यपाल से सरकार बनाने का दावा किया था।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। कांग्रेस ने वजुभाई वाला के येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की शपथ लेने के न्योते के खिलाफ रात में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की अपील की और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट राजी भी हो गया। कांग्रेस ने याचिका दायर कर येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण रोकने की मांग की। रात में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। हालांकी सुप्रीम कोर्ट ने शपथ ग्रहण रोकने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी से उनके विधायकों की सूची और सरकार बनाने का आमंत्रण पत्र मांगा है। कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु संघवी पहुंचे। उन्होंने कोर्ट में पूछा कि उनके पास 117 विधायक हैं जबकी बीजेपी का पास 104। ऐसे में बीजेपी बहुमत कैसे साबित करेगी। वहीं दूसरी तरफ से मुकुल रोहतगी ने तर्क देते हुए कहा कि राज्यपाल के पास सबसे बड़ी पार्टी को न्योता देने का अधिकार होता है। अगर वो बहुमत साबित नहीं कर पाएगी तो दूसरी पार्टी को मौका मिलेगा। साथ ही कांग्रेस ने कहा कि येदियुरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए 7 दिन मांगे थे तो राज्यपाल ने 15 दिनों का समय क्यों दिया। ऐसा पहली बार हो रहा है की किसी पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। गोवा में हुए चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन चुनाव के बाद हुए गठबंधन के बाद बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिला। कर्नाटक में नियम कैसे बदल गए। सिंघवी ने कहा कि अगर कोर्ट धारा 356 के तहत राष्ट्रपति शासन को रोक सकता है तो राज्यपाल के आदेश को क्यों नहीं रोक सकता। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के मुकुल रोहतगी ने भी कोर्ट में याचिका खारिज करने की मांग की।

गौरतलब है की इससे पहले हुए गोवा और मणिपुर के चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बावजूद उसके दोनों प्रदेशों के राज्यपाल ने चुनाव के बाद बुए बीजेपी के गठबंधन को सरकार बनाने का मौका दिया। लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस के साथ ऐसा नहीं हुआ। जेडीएस के समर्थन के साथ कांग्रेस ने बहुमत का आंकड़ा तो हासिल कर लिया लेकिन राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दे दिया। जाहिर है, अभी कर्नाटक में राजनीतिक उथापुथल अगले 15 दिनों तक तो जारी रहेगी। बीजेपी बहुमत साबित करने में लगी रहेगी और कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज फिर दोपहर में सुनवाई करेगी।

इससे पहले प्रेस कांफ्रेंस कर के जेडीएस के कुमारस्वामी ने बीजेपी पर उनके विधायकों को 100 करोड़ में खरीदने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके विधायकों को डराया धमकाया जा रहा है और खरीदने की कोशिश की जा रही है। साथ ही कांग्रेस के हवाले से यह भी कहा गया था कि बीजेपी के 6 नेता उनके संपर्क में हैं। ऐसे में अब यह तो आने वाले 15 दिनों में ही पता चलेगा की बीजेपी बहुमत कैसे साबित करती है।


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