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ISIS के कब्जे में रहीं यजीदी महिला नादिया मुराद ने जीता नोबेल पुरस्कार

 

आतंकवादियों के चंगुल से जान बचा कर भागी यजीदी महिला नादिया मुराद को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। नादिया इस सम्मान से बेहद खुश हैं और उन्होंने कहा है कि वह अवॉर्ड याजिदी,  इराकी,  कुर्द, अन्य पीड़ित अल्पसंख्यों और दुनियाभर में यौन उत्पीड़न का शिकार हुए अनगिनत लोगों को समर्पित करना चाहेंगी।

 

नादिया ने कहा,  'मैं इस अवसर के लिए आभारी हूं जिसके जरिए मुझे याजिदी लोगों की दशा की तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने का अवसर मिलेगा, जिन लोगों ने आईएस के नरसंहार को झेला है जिसकी शुरुआत 2014 में हुई थी।'

 

कौन है नादिया मुराद ?

नादिया मुराद  इराक की यजीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म इराक के कोजो में 1993 में हुआ था। 21 साल की उम्र में ही उन्हें आईएसआईएस ने अगवा करके तीन सालों तक बंधक बनाकर रखा था। कैद से छूटने के बाद मुराद ने नादिया अभियान की स्थापना की। यह संस्था नरसंहार, सामूहिक अत्याचार और मानव तस्करी से पीड़ित बच्चों और महिलाओं की मदद करती है।

 


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