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हरियाणा सरकार का फैसला, श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए चलाया जाएगा अभियान

 

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई को मद्देनज़र रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। बता दें हरियाणा के श्रम एवं रोज़गार मंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि जल्द ही प्रदेश में श्रमिकों के बच्चों की निर्बाध पढ़ाई के लिए ‘ज़ीरो ड्रॉप आऊट’ नियम पर अभियान चलाया जाएगा। श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए यह अभियान ये सुनिश्चित करेगा कि ऐसे बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

 

इस विषय में नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के ईट-भट्टों , दुकानों और घरों में काम करने वाले बाल मज़दूरों के स्वामियों को पहले समझाया जाए अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। बता दें बच्चों के संरक्षण के लिए प्रदेश में 69 बाल देखभाल गृह है, जहां लावारिस बच्चों का भी संरक्षण किया जाता है। हरियाणा सरकार यह उम्मीद करती है कि इस कार्य की सफलता के लिए प्रदेश की सामाजिक संस्थाएं तथा सभी एनजीओ आगे आएंगी।

 

इस दौरान रोजगार मंत्री नायब सिंह सैनी ने एक नए नारे ‘बच्चा पढ़ेगा, देश बढ़ेगा’ का आगाज भी किया और कहा कि हरियाणा सरकार ने श्रमिक बच्चों की शिक्षा के लिए अनेक योजनाओं की शुरूआत की है। और इस अभियान के तहत राज्य के मज़दूरों को उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे वे भविष्य में एक सफल नागरिक बन सकेंगे। बता दें सरकार द्वारा श्रमिक के बच्चों को पढ़ाई के दौरान आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जोकि कक्षा 1 से 8 के तक के विद्यार्थियों को 8 हज़ार रुपये, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को 10 हज़ार रुपये, कक्षा 12 से स्नातक तक 15 हज़ार तथा कक्षा स्नातक से ऊपर के विद्यार्थियों को 20 हज़ार रुपये दिये जाते हैं।

 

इसके अलावा सैनी ने कहा कि कक्षा 10 वीं या 12 वीं में किसी श्रमिक बच्चे के 90 प्रतिशत या अधिक अंक आने पर उसे 51 हज़ार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रदेश के सभी श्रमिकों को पंजीकरण करवाने के लिए सरकार विशेष अभियान चलाएगी ताकि उन्हें पूरी तरह से विभाग की योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही उन्होंने कहा कि अब 21 हज़ार रुपये मासिक तक वेतन प्राप्त करने वाले लोगों को विभाग में पंजीकृत करवाया जा सकेगा।

 

इस अवसर पर आयोग की चेयरमैन ज्योति बैंदा ने कहा कि समाज की असमानताओं का बच्चों पर असर नहीं पडऩा चाहिए और आर्थिक कमज़ोरी के आधार पर बच्चों के साथ भेदभाव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जानी चाहिए।


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