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हरियाणा: सरकार के पास नहीं कर्मियों का सही आकंड़ा, RTI और आयोग के आंकड़ों में अंतर

 

हरियाणा: हरियाणा में जातिगत आकंड़ों पर तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है, जिसके चलते हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग को अब भी सरकार से जानकारी का इतंजार है। जिसके बाद अब इस मामले में कई हैरतंगेज खुलासे हो रहे है।

जाट आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने जो सर्वे करवाया है, उसे लेकर अब मामला तूल पकड़ने लगा है। जनता टीवी ने 2 जनवरी को इस खबर को प्रमुखता से उठाया था, वहीं सहयोगी अखबार दैनिक हरिभूमि ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया, जिसपर हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग ने संज्ञान लिया है। हरिभूमि ने RTI से जो जानकारी हासिल की है, वो सरकार की ओर से आयोग के पास भेजे आंकडों से मेल नहीं खाते।

 

HRMS पोर्टल के अनुसार...       

 

-कुल 91 विभागों में 4 लाख 84 हजार 256 पद स्वीकृत हैं

-2 लाख 56 हजार 731 कर्मचारी-अधिकारी कार्यरत हैं

-शेष पद रिक्त पड़े हैं

-2 लाख 38 हजार 708 ने अपनी जाति की जानकारी दी है

-18 हजार 23 ने जाति की जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं की है

 

वहीं सरकार ने आयोग के पास जो जानकारी 14 दिसंबर 2017 को भेजी थी, उसके अनुसार 2 लाख 41 हजार 937 कर्मचारियों की जानकारी दी गई है। इस डाटा के सार्वजनिक होने के बाद आयोग के एक व्यक्ति ने सरकारी आंकड़ों को चुनौती दी है। ऑल इंडिया जाट इंटेलेक्चुअल फोरम ने प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कमीशन के चेयरमैन से इस्तीफा मांगा है। फोरम का कहना है कि कमीशन ने जो डाटा दिया है, वो गलत है।

बता दें कि पिछड़ा वर्ग कमीशन के चेयरमैन को हटाने की मांग करते हुए फोरम ने दोबारा सर्वे कराने की मांग की है। तो वहीं पिछड़ा वर्ग आयोग को सरकारी कर्मचारियों के जातिगत आंकड़े सार्वजनिक करने में अभी कुछ और समय लगेगा। आयोग का कहना है कि सरकार से अभी पूरे आंकड़े नहीं मिल पाए हैं, जिसके लिए आयोग ने दैनिक हरिभूमि में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार को दोबारा आंकड़े देने के लिए कहा है। 


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