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FATF ने पाक को ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने का लिया फैसला, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाक की छवि होगी आघात

 

भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के उसे ग्रे लिस्ट में डालने के फैसले का स्वागत किया है।

 

बता दें पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता नदीम नुसरत ने भी पाक को ग्रे सूची में रखने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने एफएटीएफ के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, 'हमने कभी नहीं देखा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया हो। नुसरत ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में आतंकी घटनाएं हुई हैं, जहां पर आतंकियों ने पाक के साथ अपने संबंध को कबूला है।  इतना ही नहीं पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है। इस बड़े झटके के बाद अब पाकिस्तान को ये डर सता रहा है कि कहीं उसे ब्लैक लिस्ट में ना डाल दिया जाए।

 

अधिकारियों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26 सूत्रीय एक्शन प्लान भी तैयार किया था बावजूद इसके उसके खिलाफ ये कदम उठाया गया।

 

विदेशी ऑफिस के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह एक राजनीतिक फैसला है और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रदर्शन का इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस लिस्ट में एक साल या उससे भी अधिक समय तक रह सकता है।

 

मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि पाकिस्तान ने काफी उच्च स्तर पर वैश्विक चिंताओं के समाधान और फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के मानक का पालन करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता जताई थी। मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकियों को वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने की बात की गई थी, लेकिन हाफिज सईद जैसे आतंकियों और जमात-उद-दावा, लश्कर जैसे संगठनों को जिस तरह की छूट पाकिस्तान में मिली हुई है यह एफआईटीएफ के मानकों के खिलाफ है।

 

इस एक्शन प्लान में बताया गया है कि आतंकियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को किस प्रकार रोका जाएगा और इसके लिए कौन कौन से कदम उठाए जाएंगे। इसमें मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को दी जा रही आर्थिक मदद पर भी रोक की बात कही गई है।
 

कहा जा रहा है कि ग्रे लिस्ट में आने से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान पहुंचेगा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी छवि को आघात होगा। इस स्थिति से बचने के लिए अख्तर ने एफएटीएफ से आग्रह भी किया था कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया जाए।
 


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