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शिक्षा विभाग ने कैप्टन अमरिंदर के ड्रीम प्रोजेक्ट को लागू करने की तैयारी की पूरी

 

शिक्षा विभाग ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट को लागू करने की तैयारी कर ली है। पंजाब में अब सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाया जाएगा। अब सरकारी स्कूलों के बच्चें भी निजी स्कूलों की तरह अत्याधुनिक ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए सूबे के 259 स्कूलों का चयन किया गया है, जिनका नोटिफिकेशन जारी हो गया है।

 

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि स्कूलों का चयन इस हिसाब से हुआ है कि हर एजुकेशन ब्लॉक और हर विधानसभा हलके में कम से कम एक स्मार्ट स्कूल जरूर होगा। स्कूलों के चयन में यह भी ध्यान रखा गया कि उनमें बच्चों की संख्या ज्यादा हो और उन तक पहुंचना आसान हो। स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट की घोषणा के समय 217 स्कूलों को स्मार्ट बनाने का फैसला किया गया था, लेकिन उसमें कई ब्लॉक और हलके रह रहे थे।

 

शिक्षा विभाग के स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट का पूरा फोकस ग्रामीण इलाकों पर है। इसी लिए 259 में से 199 स्मार्ट स्कूल ग्रामीण इलाकों में से चुने गए हैं। ताकि गांवों के बच्चों को भविष्य की कड़ी प्रतिस्पर्धा केलिए तैयार किया जा सके। शहरों के हिसाब से सबसे ज्यादा 27 स्कूल लुधियाना, 25 गुरदासपुर और 21-21 पटियाला व अमृतसर के हैं। बॉर्डर एरिया केजिलों को भी काफी प्रतिनिधित्व दिया गया है।

 

बता दें पहले चरण में सीनियर सेकेंडरी के सात और हाई स्कूलों के पांच क्लास रूम को स्मार्ट बनाया जाएगा। उसके बाद पूरे स्कूल को ही स्मार्ट में तब्दील कर दिया जाएगा। स्मार्ट क्लास रूम में हाई स्पीड इंटरनेट, लैपटॉप, प्रोजेक्टर लगाए जाएंगे। साथ ही अत्याधुनिक लैब और खेल का बुनियादी ढांचा भी मुहैया कराया जाएगा। सारा ढांचा करीब तीन माह में तैयार होने की उम्मीद है।

 

स्मार्ट स्कूल के टीचरों को चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग दी जा रही है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में ट्रेनिंग संपन्न हो जाएगी। इन स्कूलों में मैथ और साइंस को इंग्लिश मीडियम में किया गया है। जिसके लिए ई-कंटेंट तैयार किया गया है। इंग्लिश, हिंदी, पंजाबी के टीचर पहले से हैं। सोशल साइंस का भी ई-कंटेंट इंग्लिश में तैयार है।

 

इन स्मार्ट स्कूलों में सब कुछ खास होगा। इनके गेट से लेकर क्लासरूम तक को खास रंग का होगा। स्कूल परिसर में जगह के मुताबिक लैंडस्केपिंग की जाएगी, पौधे लगाए जाएंगे। इनके लुक पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए आर्किटेक्ट की सेवाएं ली जा रही हैं। इन स्कूलों के बच्चों की वर्दियां भी अलग होंगी। स्कूलों के रेनोवेशन, पेंट, बाउंड्री वाल और लड़के, लड़कियों के अलग टॉयलेट के लिए फंड जारी किए जा रहे हैं।

 

डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन प्रशांत गोयल ने बताया कि, 259 सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट केलिए चुना गया है। हर एजुकेशन ब्लॉक और विधानसभा हलके में कम से कम एक स्कूल हो, इसका ध्यान रखा गया है। स्कूलों के रेनोवेशन का काम जल्द शुरू होगा, उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। सारा ढांचा मुकम्मल होने में करीब तीन महीने लगने की उम्मीद है।


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