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8 अक्टूबर को आखिरी श्राद्ध के दिन करें ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध

 

पितृपक्ष का समापन आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या के दिन होता है जो कि श्राद्ध का अंतिम दिन होता है यानी अमावस्या से पितृ पक्ष समाप्त हो जाएगा और कल यानी 8 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या है। इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या या पितृमोक्ष अमावस्या या पितृ अमावस्या या महालय अमावस्या भी कहते हैं।

 

सर्वपितृ अमावस्या के दिन ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध किया जाता है। यानी जिन पितरों का नाम याद न हो या उनके बारे में कोई जानकारी न हो ऐसे पितरों का श्राद्ध अमावस्या को करते हैं।

 

सर्वपितृ अमावस्या के दिन से ही दशहरा महोत्सव की शुरुआत होती है। महालया, नवरात्र के प्रारंभ और पितृपक्ष के अंत का प्रतीक है। इस दिन पितृ हमसे विदा लेते हैं। इसलिए इस दिन सभी पितरों का स्मरण करना चाहिए।

 

सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें। पवित्र नदियों में स्नान करें। घर में बने भोजन में से सर्वप्रथम गाय के लिए, फिर श्वान के लिए, कौए के लिए, चीटियों के लिए भोजन का अंश प्रदान करें। पितरों को श्रद्धापूर्वक विधि-विधान से विदा करें और उनसे आशीर्वाद की प्रार्थना करें।


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