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देश भर में महाशिवरात्रि की धूम, 21 साल बाद दो दिन का संयोग

 

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले व्रतों में महाशिवरात्रि का पर्व सबसे उपर आता है। ऐसे में भारत समेत दुनिया भर में सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। शिवालयों को फूल-मलाओं से सजाया गया है। शिव भक्त मंदिरों में बेलपत्र और कच्चे दूध से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने सुबह से ही लाइन में लगे हुए है।

बता दें कि यह महापर्व फागुन चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार फागुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को रात 10.22 बजे लग रही है जो 14-15 की मध्य रात्रि 12.17 बजे तक रहेगी। फागुन चतुर्दशी तिथि इस बार 13 व 14 दोनों ही दिन मध्य रात्रि में मिल रही है। ऐसे में महाशिवरात्रि दोनों ही दिन यानी 13 व 14 फरवरी को मनाई जाएगी।  

 

सुबह से महाकाल के दर्शन के लिए भक्त लाइन में लगे हुए हैं। भोलनाथ के जयकारों से मंदिर गूंज रहा है। वहीं, पुणे के भीमाशंकर मंदिर में भी शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। पूरा वातावरण भक्तिमय हो रखा है। चारों दिशाओं से भगवान शिव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं।

 

बता दें ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि भगवान शिव की उपासना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व विशेष स्थान रखता है। इस तिथि पर सच्ची श्रद्धा से जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। महाशिवरात्रि (13 फरवरी, मंगलवार) पर शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय क तैयारी कर रहे हैं। भगवान शिव की उपासना के साथ हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय भी बताया गया है। बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

धूप और दीप से भगवान शिव का पूजन किया जाता है. भगवान शिव को बेल के पत्ते अतिप्रिय हैं, इसलिए लोग उन्हें बेलपत्र अर्पण करते हैं. देश में कई जगह शाम को शिव बारात निकालने की भी परंपरा है.


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