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चीन ने भी माना मोदी का लोहा, तीन साल में भारत की कूटनीति चुस्त और निश्चयपूर्ण

 

बीजिंग: चीन सरकार के माध्यम से संचालित जाने माने थिंक टैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि मोदी सरकार में भारत की विदेश नीति चुस्त अैर निश्चयपूर्ण हो गई है। साथ ही उसकी जोखिम लेने की क्षमता भी उभार पर है। चीनी विदेश मंत्रालय से संबद्ध थिंक टैंक चाइना इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (सीआईआईएस) के उपाध्यक्ष रोंग यिंग ने कहा कि विगत तीन साल में भारत की कूटनीति चुस्त और निश्चयपूर्ण हो गई है। साथ ही इसने एक विशिष्ट एवं अद्वितीय 'मोदी सिद्धांत' स्थापित किया है, जो नई स्थिति में एक महान शक्ति के रूप में भारत के उभार के लिए है।

 

सीआईआईएस जर्नल में छपे लेख के मुताबिक भारत-चीन संबंधों में मोदी के तीन सालों के कार्यकाल के दौरान सधी हुई मजबूती आई है।

 

यह लेख वैसे समय में सामने आया है जब डोकलाम विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच करीब दो महीने से अधिक समय तक सैन्य गतिरोध की स्थिति बनी रही थी। लेख में कहा गया है कि दोनों देशों को एक दूसरे के विकास के लिए रणनीतिक सहयोग में सहमति बनानी चाहिए।

इसमें कहा गया है, 'चीन और भारत के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों की ही स्थिति है। आने वाले दिनों में प्रतिस्पर्धा और सह-अस्तित्व ही नियम बनेगा। यह भारत-चीन के बीच के संबंधों की यथास्थिति है, जो कभी नहीं बदलेगा।'

लेख में कहा गया है कि चीन भारत के विकास में बाधा नहीं है बल्कि यह भारत के लिए बड़ा मौका है। इसमें लिखा गया है, 'चीन भारत के विकास को नहीं रोक सकता और नहीं रोकेगा। भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा खुद भारत ही है।'

वहीं चीन के लिए भारत काफी अहम पड़ोसी और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार के लिए अहम साझेदार है।

 


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