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बाल संरक्षण टीम ने भीख मांगने वाले बच्चों को किया रेस्क्यू, हाथ-पैर में पट्टी और चोट के निशान नकली

 

यमुनानगर: रेलवे स्टेशन, चौराहों या दूसरी सार्वजनिक जगहों पर आपने भी बच्चों को भीख मांगते देखा होगा। ऐसे में अगर भीख मांगते इन बच्चों को देख कर आपका भी दिल पिघल जाता है और आप उनकी मदद के लिए रुपए भी दे देते हैं तो थोड़ा ठहर जाइये।   

पहले इन बच्चों की हकीकत जान लीजिए। बता दें कि इन बच्चों के शरीर पर जो चोट के निशान आपको नज़र आते हैं, ये असल में जलने या गिरने की वजह से नहीं लगी होती। बल्कि ये नकली चोट के निशान हैं। जी हां यमुनानगर में जिला बाल संरक्षण टीम ने जब इन बच्चों को रेस्क्यू कर डॉक्टर से जांच करवाया तो ये चोट नकली निकली। अधिकारियों ने बताया कि लोगों के सहयोग से 3 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। और कोशिश है कि इन बच्चों को स्कूल में भर्ती कारकर बेहतर शिक्षा मुहैया कराई जाएगी।

बताते चलें कि इस मामले में लोगों का सहयोग भी काफी मिला। इलाके के लोगों ने बताया कि रोज़ाना उन्हें इस तरह दयनीय हालत में भीख मांगते बच्चे नज़र आ जाते थे। जिसके बाद उन्होंने इनकी मदद करने की कोशिश की तो एक नया मामला सामने आया। लोगों ने पुलिस को जानकारी दी और जिला बाल संरक्षण टीम की मदद से इन बच्चों को भिक्षावृत्ति के गोरखधंधे से बचाया।

उधर रेस्क्यू किए गए बच्चे की मानें तो भिक्षावृत्ति का ये गोरखधंधा उनका चाचा ही उनसे करवा रहा था। ऐसे में समाज के लिए ये बड़ी चुनौती है कि किस तरह इन बच्चों के बचपन को संवारा जाए और अपनों के ही चंगुल से बचाया जाए।


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