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पपीते की पत्ती का रस, तुलसी की पत्ती, लहसुन...चिकनगुनिया मेंं कितने कारगर हैं ये उपाय?

 

 

आमतौर पर हमारे यहां हर बीमारी के लिए घरेलू उपाय हैं. ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले घरेलू उपाय आजमाते हैं. घरेलू उपायों की सबसे बड़ी खूबी ये होती है कि इनका कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता है लेकिन कोई भी उपाय करने से पहले ये जान लेना जरूरी है कि वो किस तरह काम करता है. बात अगर चिकनगुनिया की करें तो इस बीमारी में पपीते की पत्ती, तुलसी की पत्ती, अजवायन, लहसुन खाने की सलाह दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं इन चीजों को खाने की सलाह क्यों दी जाती है?

1. क्यों दी जाती है पपीते की पत्ती का रस पीने की सलाह?
कारण: डेंगू, चिकनगुनिया में पपीते की पत्ती को उबालकर पीने की सलाह दी जाती है. कुछ लोग इसका रस भी पीने की सलाह देते हैं. ये वाकई एक कारगर उपाय है. दरअसल, पपीते की पत्तियों में chymopapin और papain नाम के दो ऐसे एंजाइम पाए जाते हैं, जो प्लेटलेट काउंट्स बढ़ाने में मदद करते हैं. डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही बीमारियों में प्लेटलेट्स काउंट कम हो जाते हैं, ऐसे में पपीते की पत्त‍ियों का रस लेना फायदेमंद है.

2. अजवायन लेने की सलाह देना कितना सही है और कितना गलत?
कारण: डेंगू, चिकनगुनिया में अजवायन भी लेने की सलाह दी जाती है. अजवायन में Thymol नाम का तेल पाया जाता है जो लोकल एनेस्थिसिया की तरह काम करता है. साथ ही इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण भी पाया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करते हैं. अजवायन में मौजूद ये लोकल एनेस्थिसिया का गुण दर्द को कम करने में मददगार है.

3. तुलसी की पत्त‍ियां लेना क्या वाकई फायदेमंद है? 
कारण: हमारे घरों में तुलसी की पत्ती का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है. तुलसी की पत्तियों में eugenol, citronellol, linalool, citral, limonene और terpineol जैसे इसेंशियल ऑयल पाए जाते हैं. इस वजह से ये एक बेहतरीन तापरोधी है. इसके अलावा इसमें मौजूद एंजाइम्स कमजोरी में भी राहत देने का काम करते हैं. इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट और बीटा-कैरोटीन इम्यूनिटी को बूस्ट करने का भी काम करते हैं.

4. लहसुन खाना रहेगा कितना फायदेमंद? 
कारण: 
लहसुन का इस्तेमाल खासतौर पर मसालेदार व्यंजन बनाने में किया जाता है. लेकिन इसके साथ ही ये एक बेहतरीन घरेलू दवा भी है. लहसुन में phyto-nutrients, मिनरल्स, विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं. लहसुन की कली में पाया जाने वाला Allicin एंटी-वायरल की तरह काम करता है. ऐसे में डेंगू और चिकनगुनिया में लहसुन लेना फायदेमंद रहता है.

5. क्यों दी जाती है सहजन खाने की सलाह? 
कारण: डेंगू ओर चिकनगुनिया हो जाने पर सहजन की फलियों का सूप पीने की सलाह दी जाती है. सहजन की फलियों के साथ ही सहजन की पत्त‍ियां भी बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं. सहजन विटामिन ए का बेहतरीन स्त्रोत है. इसके अलावा ये विटामिन बी6 और बी1 का भी अच्छा माध्यम है. सहजन के सेवन से शरीर में ताकत आती है और मांस-पेशियों को मजबूती मिलती है. 


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