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नहाय-खाय से हुई छठ महापर्व की शुरुआत, 14 नवंबर को सूर्योदय के अर्घ्य से होगी समाप्ति

 

छठ महापर्व आज से नहाय-खाय से शुरू हो गया है। इस अवसर पर दिल्ली में धूम-धाम से तैयारियां की जा रही हैं। बाजारों में रौनक बढ़ गई है। यमुना घाटों को भी तैयार किया जा रहा है। 14 नवंबर को सूर्योदय के अर्घ्य देने के साथ ये पर्व समाप्त हो जाएगा।

 

महापर्व के प्रसाद के लिए पहले से ही घरों में गेहूं चुनने और मिट्टी का चूल्हा तैयार करने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस पर्व का मुख्य प्रसाद ठेकुआ जो आटे से बनता है जो खजूर आटा और मैदे से तैयार किया जाता है। व्रतधारी पूजा सामग्री के लिए नए बर्तन और कपड़े खरीदने में मशगूल हैं। साड़ियों की दुकानों पर भी रौनक है।
 

पूजन सामग्री के लिए दिल्ली के पालम इलाके, पूर्वी दिल्ली, द्वारका, बुराड़ी, गोपालपुर, जहांगीर पुरी समेत कई जगहों पर बाजार में रौनक बढ़ गई है। कोशी, पीतल का सूप, बांस का सूप, दउरा, केला, संतरा, अनार, सेब, पानी फल, गागल, पानी वाला नारियल, गन्ना, कच्ची हल्दी, मूली, अदरक, सूथनी आदि की दुकानें सज गई हैं।

 

कठिन व्रतों में से एक है छठ पूजा
पंडित राधेश पांडेय के अनुसार भगवान सूर्य को समर्पित इस पूजा को कठिन व्रतों में से माना जाता है। व्रती दो दिनों तक निर्जला रहते है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को यह व्रत रविवार से आरंभ हो रहा है।

 

दूसरा दिन सोमवार को खरना होगा। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगे। मुख्य प्रसाद ठेकुआ, टिकरी है।

 

मंगलवार को खष्ठी को व्रती अस्तांचल सूर्य को तालाब, नदी के घाट के किनारे अर्घ्य देंगे। सप्तमी को प्रात: सूर्योदय के समय अर्घ्य देंगे और विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करेंगे।

 

 

 

 


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