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चंद्र ग्रहण 2018: ग्रहण पर ऐसा दिखेगा नजारा, जानें किस समय तक रहेगा प्रभाव

 

नई दिल्ली: एशिया में 35 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब ब्लू मून, ब्लड मून और सुपर मून एक साथ दिखेगा। जी हां इस साल का पहला चंद्रग्रहण आज है। इसके साथ ही एशिया में 35 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब ब्लू मून, ब्लड मून और सुपर मून एक साथ दिखेगा। यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, यानी इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से कुछ देर के लिए पूरी तरह ढक जाएगा।

चंद्र ग्रहण का अनोखा संयोग-

-31 जनवरी 2018 का पहला चंद्र ग्रहण

-176 साल बाद बन रहा खास संयोग

-एक साथ दिखेगे ब्लू मून, ब्लड मून और सुपर मून

-35 सालों बाद बना ऐसा संयोग

-30 दिसंबर, 1982 को बना था ऐसा संयोग

चंद्रग्रहण आज शाम 5.18 बजे होगा प्रारंभ

रात 8.42 बजे समाप्त होगा ग्रहण

 

31 जनवरी 2018 यानी आज चंद्र ग्रहण लगेगा जो की कई माइनों में खास है। बता दें कि एशिया में 35 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब ब्लू मून, ब्लड मून और सुपर मून एक साथ दिखेगा। वहीं दावा है कि पूर्णिमा के चांद की तुलना में यह 30 फीसदी ज्यादा चमकीला और 12 फीसद बड़ा होगा। वहीं भारत में चंद्रग्रहण 5.18 मिनट से लेकर 8.41 मिनट् तक लगेगा ...हालांकि  इस साल और खास बात यह है कि एशिया में करीब 35 सालों बाद चंद्रमा तीन रंगों सुपर मून, ब्लू मून और ब्लड मून में दिखेगा। इस तरह का संयोग एशिया में 30 दिसंबर, 1982 को बना था। कई जगहों पर इस दिन मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। चंद्र ग्रहण के कारण सूतक काल भी शुरू हो जाएगा।

 

क्या है चंद्र ग्रहण ? 

-जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है

-चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को रोक, उसमें अपनी छाया बनाती है

-इस घटना को चंद्र ग्रहण या ब्लड मून भी कहा जाता है

 

आइये जानते हैं कि सुपर मून, ब्लू मून और ब्लड मून क्या होता है।

 

सुपर मून

सुपर मून उस स्थिति में होता है जब चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी घटती है। पृथ्वी सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आ जाती है।

ब्लू मून 

पूर्ण चंद्रमा दिखता है लेकिन चंद्रमा के निचले हिस्से से नीला प्रकाश निकलता दिखेगा। इसे ब्लू मून कहा जाता है।

अगला ब्लू मून 2028 और 2037 में दिखेगा

ब्लड मून

पृथ्वी की छाया पूरे चंद्रमा को ढंक लेती है लेकिन फिर सूर्य की कुछ किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं। जब सूर्य की किरणें चंद्रमा पर गिरती हैं तो ये लाल दिखता है।

इसी कारण इसे ब्लड मून कहा जाता है

वहीं बता दे की आज होने वाली पूर्णिमा की तीन खासियत है। जिसमें पहली यह कि यह सुपर मून की एक श्रंखला में तीसरा अवसर है जब चांद धरती के निकटतम दूरी पर होगा। दूसरी यह कि इस दिन चांद सामान्य से 14 फीसदा ज्यादा चमकीला दिखेगा. औऱ तीसरी यह कि एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होगी, ऐसी घटना आमतौर पर ढाई साल बाद होती है।

तो वहीं भारत के अलावा यह एशिया, रूस, मंगोलिया, जापान, आस्ट्रेलिया, आदि में चंद्रमा के उदय के साथ ही शुरू हो जाएगा। जबकि, नॉर्थ अमेरिका, कनाडा और पनामा के कुछ हिस्सों में चंद्रमा के अस्त होते वक्त दिखाई देगा। वहीं इस साल 2 चंद्रग्रहण और 3 सूर्यग्रहण होंगे। इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण 27 जुलाई को है।वही वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्लड-ब्लू मून की स्थिति इससे पहले 1982 में बनी थी। अब 31 जनवरी 2037 को भी सुपर ब्लू-ब्लड मून नजर आएगा।


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