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अफगानिस्तान में हुए आत्मघाती हमले के बाद, सिख कर रहे हैं भारत आने का विचार

 

अफगानिस्तान के जलालाबाद में सिखों की हत्या के बाद अब समुदाय के कुछ लोग देश छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। इस आत्मघाती हमले में सिख समुदाय के 13 लोगों की मौत हो गई थी जिसके चलते अब अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक सिख समुदाय के कई लोग देश छोड़कर भारत आने की तैयारी कर रहे हैं।

 

आपको बता दें कि रविवार को एक आत्मघाती हमलावर ने राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने जा रहे सिखों और हिंदुओं के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में 19 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है। बता दें हमले के पीड़ितों में संसदीय चुनाव में एकमात्र सिख उम्मीदवार अवतार सिंह खालसा और समुदाय के जानेमाने कार्यकर्ता रावल सिंह भी शामिल हैं।

 

इस संदर्भ में हिंदुओं और सिखों के नैशनल पैनल के सचिव तेजवीर ने कहा कि, 'इस्लामिक आतंकी हमारी धार्मिक प्रथाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम अफगानी हैं। सरकार हमें मान्यता देती है लेकिन आतंकवादी हम पर हमले करते हैं क्योंकि हम मुस्लिम नहीं हैं।'  साथ ही उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में सिख समुदाय अब करीब 300 परिवारों तक ही सीमित हो गया है। हमारे पास दो गुरुद्वारे हैं, एक जलालाबाद और दूसरा राजधानी काबुल में है। आपको बता दें कि भले ही अफगानिस्तान मुस्लिम बहुल हो पर यहां 1990 के दशक में गृह युद्ध छिड़ने से पहले तक ढाई लाख से ज्यादा सिख और हिंदू रहते थे।

 

सूत्रों के अनुसार सरकार हमले में मारे गए सिखों के अंतिम संस्कार में सहयोग कर रही है। हालांकि कुछ सिख ऐसे भी हैं जो कह रहे हैं कि वे अफगानिस्तान से कहीं नहीं जाएंगे। काबुल में सिख दुकानदार संदीप सिंह ने कहा, 'हम कायर नहीं हैं। अफगानिस्तान हमारा देश है और हम कहीं नहीं जा रहे हैं।'


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